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हापुड़ में किसानों का हुंकार भरा ज्ञापन, MSP की कानूनी गारंटी समेत 11 प्रमुख मांगों पर डीएम से हस्तक्षेप की मांग

अंकित गुप्ता /समय दिन /उजागर खबर /हापुड़

हापुड़। खेती-किसानी से जुड़े राष्ट्रीय और स्थानीय मुद्दों को लेकर मंगलवार को किसान संगठनों ने जिला मुख्यालय पहुंचकर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। किसानों ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी, गन्ना किसानों के बकाया भुगतान, मुफ्त बिजली, कर्जमाफी, छुट्टा पशुओं की समस्या सहित 11 प्रमुख मांगों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि मांगों की अनदेखी होने पर आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।

किसानों ने कहा कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि उपज का उचित मूल्य नहीं मिल रहा। इसलिए MSP को कानूनी गारंटी दी जाए, ताकि कोई भी व्यापारी निर्धारित समर्थन मूल्य से कम कीमत पर फसल न खरीद सके।

ज्ञापन में अमेरिका के साथ प्रस्तावित किसी भी ऐसी व्यापारिक संधि (Trade Deal) का विरोध किया गया, जिससे भारतीय किसानों और कृषि क्षेत्र के हित प्रभावित होने की आशंका हो। किसानों का कहना है कि विदेशी कृषि उत्पादों को बढ़ावा मिलने से देश के किसानों की आर्थिक स्थिति कमजोर होगी।

किसानों ने किसान-मजदूरों की संपूर्ण कर्जमाफी और खेती के लिए मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने की मांग उठाई। उनका कहना है कि महंगे बीज, खाद, डीजल और सिंचाई की बढ़ती लागत के कारण खेती घाटे का सौदा बनती जा रही है।

भूमि अधिग्रहण के मुद्दे पर किसानों ने मांग की कि बिना किसान की सहमति भूमि अधिग्रहित न की जाए। यदि अधिग्रहण आवश्यक हो तो बाजार मूल्य का चार गुना मुआवजा दिया जाए तथा जनपद के सर्किल रेट में बढ़ोतरी की जाए।

गन्ना किसानों ने सिंभावली और बृजनाथपुर चीनी मिलों पर बकाया भुगतान लंबित होने का आरोप लगाते हुए ब्याज सहित तत्काल भुगतान की मांग की। किसानों का कहना है कि भुगतान में देरी से उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है और अगली फसल की तैयारी भी बाधित हो रही है।

ज्ञापन में छुट्टा एवं आवारा पशुओं की समस्या को गंभीर बताते हुए उन्हें गौशालाओं में भेजने की मांग की गई। किसानों ने कहा कि फसलें लगातार बर्बाद हो रही हैं और पशुओं के कारण सड़क हादसों व जानमाल का खतरा भी बढ़ा है।

किसानों ने बिजली विभाग और विजिलेंस की कार्यशैली पर भी सवाल उठाते हुए छापेमारी के नाम पर उत्पीड़न और अवैध वसूली के आरोप लगाए। उन्होंने जर्जर विद्युत लाइनों को बदलने, अघोषित बिजली कटौती रोकने तथा किसानों के उत्पीड़न पर अंकुश लगाने की मांग की।

स्मार्ट मीटर के नाम पर नए बिजली कनेक्शन की बढ़ी हुई फीस का विरोध करते हुए किसानों ने कहा कि पहले जहां नया कनेक्शन करीब ₹1400 में मिल जाता था, अब लगभग ₹7500 वसूले जा रहे हैं। इसे तत्काल वापस लेकर पुरानी व्यवस्था बहाल की जाए।

खाद और यूरिया की कमी तथा कालाबाजारी पर भी किसानों ने नाराजगी जताई और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। साथ ही सभी सहकारी समितियों पर पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराने की बात कही।

पर्यावरण संरक्षण का मुद्दा उठाते हुए किसानों ने अवैध खनन, प्रतिबंधित पेड़ों के कटान और सड़कों पर दौड़ रहे अनधिकृत डग्गामार वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

इसके अलावा गंगा एक्सप्रेस-वे पर अधूरी सर्विस रोड, स्ट्रीट लाइट की कमी, स्पीड ब्रेकर और अंडरपासों में जलभराव जैसी समस्याओं को दूर करने की मांग भी ज्ञापन में शामिल रही। किसानों का कहना है कि इन कमियों के कारण आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं।

ज्ञापन के अंत में किसानों ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार कर समाधान नहीं किया गया तो वे लोकतांत्रिक तरीके से बड़े स्तर पर आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। किसानों ने जिलाधिकारी से सभी मांगों को राज्य और केंद्र सरकार तक प्राथमिकता के आधार पर पहुंचाने की अपील की।

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