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जया बच्चन का सेल्फी विवाद: जनता से कटे नेता पर उठे सवाल

ब्यूरो रिपोर्ट अंकित गुप्ता (ujagarkhabar.in) 

जया बच्चन का घमंड चरम पर? जनता के साथ फिर दिखा तुनकमिजाज रवैया!

नई दिल्ली।

राजनीति में कहा जाता है कि नेता की असली ताकत जनता होती है। लेकिन अगर कोई नेता 21 साल से सांसद हो और जनता से दूरी बनाए रखे, तो सवाल उठना लाजमी है।

समाजवादी पार्टी की राज्यसभा सांसद जया बच्चन एक बार फिर अपने गुस्से और तुनकमिजाजी को लेकर विवादों में हैं।

 

ताज़ा मामला सोमवार का है, जब दिल्ली में विपक्षी दलों के विरोध मार्च के बाद, कांस्टीट्यूशन क्लब के बाहर एक व्यक्ति ने उनसे सिर्फ सेल्फी लेने की कोशिश की। लेकिन जया बच्चन ने उसे धक्का देते हुए कहा — “यह क्या कर रहे हो?”

यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही लोगों ने उन्हें “घमंडी” और “जनता से कटे” नेता के तौर पर घेर लिया।

पुराना रिकॉर्ड भी रहा विवादित

यह पहली बार नहीं है।

2023 में इंदौर एयरपोर्ट पर एक कर्मचारी को सेल्फी लेने पर नौकरी से निकलवाने की धमकी।

राज्यसभा में तत्कालीन सभापति जगदीप धनखड़ के साथ तीखी बहस।

एक कॉलेज सेमिनार में कैमरामैन को अपशब्द।

ईशा देओल की गोद भराई में रूखा व्यवहार।

इन सभी घटनाओं ने उनकी छवि को एक ऐसे नेता की तरह पेश किया है, जो जनता से जुड़ने के बजाय दूरी और घमंड को तवज्जो देती हैं।

सवाल बड़ा है

क्या यह अहंकार उनके पति अमिताभ बच्चन की 3000 करोड़ की संपत्ति का है?

अगर जनता से इतनी दूरी है, तो क्यों न राजनीति से इस्तीफा देकर मुंबई के ‘जलसा’ में आराम करें?

समाजवादी पार्टी जैसी जनता-आधारित पार्टी को क्या ऐसे नेताओं से नुकसान नहीं हो रहा?

राजनीति का मूल मंत्र है — जनता पहले

लेकिन जया बच्चन के मामले में यह मंत्र कहीं खोता नजर आ रहा है।

 

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