रामलीला मैदान की पैठ बंद होने से 2 हजार परिवारों की रोजी-रोटी पर संकट, पुनः शुरू कराने की मांग

अंकित गुप्ता /समय दिन /उजागर खबर /हापुड़
हापुड़। शहर के रामलीला मैदान में लंबे समय से लगती आ रही पैठ बंद होने से छोटे दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी व्यापारियों, मजदूरों और अन्य कारोबार से जुड़े लोगों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। पैठ से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से करीब 2,000 परिवारों की रोजी-रोटी जुड़ी होने का दावा किया जा रहा है। पैठ बंद होने के बाद प्रभावित लोगों ने प्रशासन से इसे पूर्व की भांति दोबारा शुरू कराने की मांग उठाई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि रामलीला मैदान में लगने वाली पैठ केवल खरीदारी का बाजार नहीं थी, बल्कि बड़ी संख्या में छोटे व्यापारियों और मजदूरों के लिए आय का प्रमुख साधन थी। यहां कपड़े, जूते-चप्पल, घरेलू सामान, खान-पान और रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी वस्तुओं की बिक्री करने वाले छोटे कारोबारी अपनी आजीविका चलाते थे। पैठ बंद होने के कारण इन व्यापारियों के साथ-साथ माल ढोने वाले मजदूरों, रेहड़ी-पटरी वालों और अन्य छोटे कामगारों की आय भी प्रभावित हुई है। ऐसे में लोगों का कहना है कि लंबे समय तक पैठ बंद रहने से उनके परिवारों के सामने आर्थिक परेशानियां बढ़ रही हैं।
प्रशासन से जनहित में समाधान की मांग
प्रभावित व्यापारियों और कामगारों की ओर से प्रशासन से मांग की गई है कि रामलीला मैदान में लगने वाली पैठ को पूर्व की भांति पुनः बहाल किया जाए। यदि किसी प्रशासनिक या अन्य कारण से रामलीला मैदान में पैठ लगाना संभव नहीं है तो प्रशासन द्वारा शहर में ऐसा उचित, सुरक्षित और सुविधाजनक वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराया जाए, जहां छोटे दुकानदार और रेहड़ी-पटरी व्यापारी अपना कारोबार कर सकें। लोगों का कहना है कि पैठ से जुड़े हजारों लोगों की आजीविका का सवाल जनहित से जुड़ा हुआ है। इसलिए प्रशासन को इस मामले में सकारात्मक पहल करते हुए जल्द से जल्द समाधान निकालना चाहिए, ताकि प्रभावित परिवारों की रोजी-रोटी फिर से सुचारु हो सके। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मांग पर क्या कदम उठाता है और हजारों परिवारों की आजीविका से जुड़े इस मुद्दे का समाधान कब तक निकलता है।



