हापुड़

ऑपरेशन HS की समीक्षा: मेरठ रेंज में जून में 6,846 हिस्ट्रीशीटरों का सत्यापन, 67 नई हिस्ट्रीशीट खोली गईं

अंकित गुप्ता /समय दिन /उजागर खबर /हापुड़

मेरठ/हापुड़ | 10 जुलाई 2026

मेरठ रेंज के डीआईजी कलानिधि नैथानी द्वारा चलाए जा रहे “ऑपरेशन HS (हिस्ट्रीशीटर)” के तहत जून माह की समीक्षा में रेंज के चारों जनपदों—मेरठ, बुलंदशहर, बागपत और हापुड़—में कुल 6,846 हिस्ट्रीशीटर अपराधियों का सत्यापन एवं निगरानी की गई। समीक्षा के दौरान 67 नई हिस्ट्रीशीट खोली गईं, जबकि 5 हिस्ट्रीशीटरों की मृत्यु होने पर उनकी हिस्ट्रीशीट समाप्त कर दी गई। इसके अलावा 773 हिस्ट्रीशीटर वर्तमान में जेल में निरुद्ध पाए गए।

डीआईजी ने बताया कि रेंज के सभी हिस्ट्रीशीटरों का यक्ष ऐप पर शत-प्रतिशत डेटा फीड कर दिया गया है। उन्होंने सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिए कि उप निरीक्षक स्तर से हिस्ट्रीशीटरों का नियमित सत्यापन कराया जाए तथा सक्रिय अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी निरोधात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

जनपदवार स्थिति

मेरठ: 13 नई हिस्ट्रीशीट, 268 हिस्ट्रीशीटर जेल में, यक्ष ऐप पर 2,584 हिस्ट्रीशीटरों का डेटा दर्ज।

बुलंदशहर: 45 नई हिस्ट्रीशीट, 220 हिस्ट्रीशीटर जेल में, 2,314 हिस्ट्रीशीटरों का डेटा अपलोड।

बागपत: 8 नई हिस्ट्रीशीट, 184 हिस्ट्रीशीटर जेल में, 1,066 हिस्ट्रीशीटरों का डेटा फीड।

हापुड़: 1 नई हिस्ट्रीशीट, 101 हिस्ट्रीशीटर जेल में, 882 हिस्ट्रीशीटरों का डेटा यक्ष ऐप पर दर्ज।

डीआईजी ने रेंज के सभी जनपद प्रभारियों को निर्देशित किया कि एडिशनल एसपी को नोडल अधिकारी बनाकर 10 या उससे अधिक मुकदमों वाले अपराधियों की हिस्ट्रीशीट अनिवार्य रूप से खोली जाए, जबकि 7 या उससे अधिक मुकदमों वाले अपराधियों का भी चिन्हीकरण कर आवश्यक कार्रवाई की जाए।

यक्ष ऐप पर डेटा अपडेट करने के निर्देश

डीआईजी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रत्येक हिस्ट्रीशीटर का माता का नाम, उपनाम, पहचान चिन्ह, जन्मतिथि और मोबाइल नंबर अनिवार्य रूप से दर्ज किया जाए। साथ ही नवीनतम फोटो, पहचान पत्र, ऑडियो रिकॉर्डिंग, बेलर विवरण, रिश्तेदार एवं मित्रों की जानकारी, एफआईआर विवरण और हालिया आपराधिक मामलों का रिकॉर्ड भी समय-समय पर अपडेट किया जाए। क्षेत्राधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक स्तर से डेटा की रैंडम जांच कर उसकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए हैं।

डीआईजी ने कहा कि हिस्ट्रीशीटरों की प्रभावी निगरानी और अद्यतन डिजिटल रिकॉर्ड से अपराध नियंत्रण को और अधिक मजबूत बनाया जा सकेगा।

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